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Dr A.P.J. Abdul Kalam Jeevan Parichay

Dr A.P.J. Abdul Kalam Jeevan Parichay
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A.p.j abdul kalam का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम धनुषकोडी गाँव के एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में जन्म हुआ था. इनके पिता का नाम जैनुलाब्दीन था यह न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे न ही पैसे वाले थे. इनके पिता नाविक थे और उनकी माता अशिअम्मा गृहणी थी abdul kalam संयुक्त परिवार में थे इसीलिए यह स्वयं पाँच भाई एवं पाँच बहन थे इनकी घर की आर्थिक स्थिथि ठीक नहीं थी, इसीलिए उन्हें बचपन से ही काम करना पडा था. अपने पिता की आर्थिक मदद करने के लिए वह स्कूल के बाद समाचार पत्र बेचने का काम करते थे. abdul kalam के जीवन पर इनके पिता का बहुत बड़ा प्रभाव रहा वे भले ही वे पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार abdul kalam के बहुत काम आए. कलाम पाँच वर्ष की उम्र  में रामेश्वरम के ग्राम पंचायत प्राथमिक विद्यालय में उनकी शिक्षा प्रारंभ हुई थी अब्दुल कलम पढाई में बहुत तेज थे, उनके शिक्षक इयादुराई सोलोमन उनसे कहा करते थे, कि जीवन मे सफलता तथा अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए जीवन में तीव्र इच्छा शक्ति, आस्था, अपेक्षा इन तीन शक्तियो को अच्छी तरह समझ लेना और उन पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए

Dr. A.P.J Abdul Kalam Ka Jeevan Ka Parichay

कलाम ने 1958 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी स्नातक होने के बाद उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया.

Dr A.P.J. Abdul Kalam का वैज्ञानिक जीवन

“यह मेरा पहला चरण था; जिसमें मैंने तीन महान शिक्षकों-डॉ विक्रम साराभाई प्रोफेसर सतीश धवन और डॉ ब्रह्म प्रकाश से नेतृत्व सीखा मेरे लिए यह सीखने और ज्ञान को अधिग्रहण करने का समय था” – abdul kalam

1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़े abdul kalam को परियोजना महानिदेशक के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह एस.एल.वी. तृतीय प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल हुआ. 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था, इस प्रकार भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया.

इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हें दिया जाता है डॉक्टर कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी नियंत्रित प्रक्षेपास्त्र गाइडेड मिसाइल्स को डिजाइन किया इन्होंने अग्नि एवं पृथ्वी जैसे प्रक्षेपास्त्रों को स्वदेशी तकनीक से बनाया था. डॉक्टर कलाम जुलाई 1992 से दिसम्बर 1999 तक रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार तथा सुरक्षा शोध और विकास विभाग के सचिव थे.

उन्होंने रणनीतिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली का उपयोग आग्नेयास्त्रों के रूप में किया इसी प्रकार पोखरण में दूसरी बार परमाणु परीक्षण भी परमाणु ऊर्जा के साथ मिलाकर किया इस तरह भारत ने परमाणु हथियार के निर्माण की क्षमता प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की.

डॉक्टर कलाम ने भारत के विकासस्तर को 2020 तक विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधुनिक करने के लिए एक विशिष्ट सोच प्रदान की, यह भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे 1982 में वे भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में वापस निदेशक के तौर पर आये और उन्होंने अपना सारा ध्यान “गाइडेड मिसाइल” के विकास पर केन्द्रित किया.

अग्नि मिसाइल और पृथवी मिसाइल का सफल परीक्षण का श्रेय काफी कुछ इन्हीं को दिया जाता है. जुलाई 1992 में वे भारतीय रक्षा मंत्रालय में वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त हुये उनकी देखरेख में भारत ने 1998 में पोखरण में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया और भारत को परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हुआ.

इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाने लगा.

राजनैतिक जीवन

Dr abdul kalam भारत के ग्यारवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे इन्हें भारतीय जनता पार्टी समर्थित एन॰डी॰ए॰ घटक दलों ने अपना उम्मीदवार बनाया था जिसका वामदलों के अलावा समस्त दलों ने समर्थन किया.

18 जुलाई 2002 को डॉक्टर कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा भारत का राष्ट्रपति चुना गया था और इन्हें 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई. इस संक्षिप्त समारोह में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उनके मंत्रिमंडल के सदस्य तथा अधिकारीगण उपस्थित थे, इनका कार्याकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ डॉक्टर abdul kalam व्यक्तिगत ज़िन्दगी में बेहद अनुशासनप्रिय थे.

यह शाकाहारी थे5इन्होंने अपनी जीवनी विंग्स ऑफ़ फायर भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले अंदाज में लिखी है इनकी दूसरी पुस्तक ‘गाइडिंग सोल्स- डायलॉग्स ऑफ़ द पर्पज ऑफ़ लाइफ’ आत्मिक विचारों को उद्घाटित करती है.

इन्होंने तमिल भाषा में कविताऐं भी लिखी हैं6यह भी ज्ञात हुआ है कि दक्षिणी कोरिया में इनकी पुस्तकों की काफ़ी माँग है और वहाँ इन्हें बहुत अधिक पसंद किया जाता है.

“2000 वर्षों के इतिहास में भारत पर 600 वर्षों तक अन्य लोगों ने शासन किया है यदि आप विकास चाहते हैं तो देश में शांति की स्थिति होना आवश्यक है और शांति की स्थापना शक्ति से होती है इसी कारण प्रक्षेपास्त्रों को विकसित किया गया ताकि देश शक्ति सम्पन्न हो”  -abdul kalam

यूं तो Dr abdul kalam राजनीतिक क्षेत्र के व्यक्ति नहीं थे लेकिन राष्ट्रवादी सोच और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की कल्याण संबंधी नीतियों के कारण इन्हें कुछ हद तक राजनीतिक दृष्टि से सम्पन्न माना जा सकता है.

इन्होंने अपनी पुस्तक इण्डिया 2020 में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया है यह भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर राष्ट्र बनते देखना चाहते थे. और इसके लिए इनके पास एक कार्य योजना भी थी परमाणु हथियारों के क्षेत्र में यह भारत को सुपर पॉवर बनाने की बात सोचते रहे थे वह विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में भी तकनीकी विकास चाहते थे.

डॉक्टर कलाम का कहना था कि ‘सॉफ़्टवेयर’ का क्षेत्र सभी वर्जनाओं से मुक्त होना चाहिए ताकि अधिकाधिक लोग इसकी उपयोगिता से लाभांवित हो सकें ऐसे में सूचना तकनीक का तीव्र गति से विकास हो सकेगा वैसे इनके विचार शांति और हथियारों को लेकर विवादास्पद हैं.

राष्ट्रपति पद को पूरा करने के बाद का कार्यकाल

कार्यालय छोड़ने के बाद कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर व भारतीय विज्ञान संस्थानबैंगलोर के मानद फैलो व एक विजिटिंग प्रोफेसर बन गए.

भारतीय अन्तरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुवनंतपुरम के कुलाधिपति अन्ना विश्वविद्यालय में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और भारत भर में कई अन्य शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में सहायक बन गए उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और अन्ना विश्वविद्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पढ़ाया

मई 2012 में कलाम ने भारत के युवाओं के लिए एक कार्यक्रम भ्रष्टाचार को हराने के एक केंद्रीय विषय के साथ “मैं आंदोलन को क्या दे सकता हूँ” का शुभारंभ किया. उन्होंने यहाँ तमिल कविता लिखने और वेन्नई नामक दक्षिण भारतीय स्ट्रिंग वाद्य यंत्र को बजाने का भी आनंद लिया.

कलाम कर्नाटक भक्ति संगीत हर दिन सुनते थे और हिंदू संस्कृति में विश्वास करते थे. इन्हें 2003 व 2006 में “एमटीवी यूथ आइकन ऑफ़ द इयर” के लिए नामांकित किया गया था

2011 में आई हिंदी फिल्म आई एम कलाम में एक गरीब लेकिन उज्ज्वल बच्चे पर कलाम के सकारात्मक प्रभाव को चित्रित किया गया उनके सम्मान में वह बच्चा छोटू जो एक राजस्थानी लड़का है खुद का नाम बदल कलाम रख लेता है.

इन्हें एक समर्थ परमाणु वैज्ञानिक होने के लिए जाना जाता है पर संयंत्र की सुरक्षा सुविधाओं के बारे में इनके द्वारा उपलब्ध कराए गए आश्वासनों से नाखुश प्रदर्शनकारी इनके प्रति शत्रुतापूर्ण थे.

“…मैं यह बहुत गर्वोक्ति पूर्वक तो नहीं कह सकता कि मेरा जीवन किसी के लिये आदर्श बन सकता है; लेकिन जिस तरह मेरी नियति ने आकार ग्रहण किया उससे किसी ऐसे गरीब बच्चे को सांत्वना अवश्य मिलेगी जो किसी छोटी सी जगह पर सुविधाहीन सामजिक दशाओं में रह रहा हो शायद यह ऐसे बच्चों को उनके पिछड़ेपन और निराशा की भावनाओं से विमुक्त होने में अवश्य सहायता करे”  -abdul kalam

Dr A.P.J Abdul Kalam सर का निधन

27 जुलाई 2015 की शाम abdul kalam भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में ‘रहने योग्य ग्रह’ Livable Planet पर एक व्याख्यान दे रहे थे जब उन्हें जोरदार कार्डियक अरेस्ट दिल का दौरा हुआ और ये बेहोश हो कर गिर पड़े, लगभग 6:30 बजे गंभीर हालत में इन्हें बेथानी अस्पताल में आईसीयू में ले जाया गया और दो घंटे के बाद इनकी मृत्यु की पुष्टि कर दी गई. अस्पताल के सीईओ जॉन साइलो ने बताया कि जब कलाम को अस्पताल लाया गया तब उनकी नब्ज और ब्लड प्रेशर साथ छोड़ चुके थे, अपने निधन से लगभग 9 घण्टे पहले ही उन्होंने ट्वीट करके बताया था कि वह शिलोंग आईआईएम में लेक्चर के लिए जा रहे हैं.

कलाम अक्टूबर 2015 में 84 साल के होने वाले थे मेघालय के राज्यपाल वी.षडमुखनाथन abdul kalam के हॉस्पिटल में प्रवेश की खबर सुनते ही सीधे अस्पताल में पहुँच गए बाद में षडमुखनाथन ने बताया कि कलाम को बचाने की चिकित्सा दल की कोशिशों के बाद भी शाम 7:45 पर उनका निधन हो गया.

अंतिम संस्कार

मृत्यु के तुरंत बाद कलाम के शरीर को भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर से शिलोंग से गुवाहाटी लाया गया जहाँ से अगले दिन 28 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति APJ abdul kalam का पार्थि‍व शरीर मंगलवार दोपहर वायुसेना के विमान सी-130 जे हरक्यूलिस से दिल्ली लाया गया लगभग 12:15 पर विमान पालम हवाईअड्डे पर उतरा सुरक्षा बलों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ कलाम के पार्थिव शरीर को विमान से उतारा वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल व तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने इसकी अगवानी की और कलाम के पार्थिव शरीर पर पुष्पहार अर्पित किये इसके बाद तिरंगे में लिपटे डॉ. कलाम के पार्थि‍व शरीर को पूरे सम्मान के साथ एक गन कैरिज में रख उनके आवास 10 राजाजी मार्ग पर ले जाया गया.

यहाँ पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित अनेक गणमान्य लोगों ने इन्हें श्रद्धांजलि दी भारत सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन के मौके पर उनके सम्मान के रूप में सात दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की.

29 जुलाई की सुबह वायुसेना के विमान सी-130 जे से भारतीय ध्वज में लिपटे कलाम के शरीर को पालम एयर बेस पर ले जाया गया जहां से इसे मदुरै भेजा गया विमान दोपहर तक मदुरै हवाई अड्डे पर पहुंचा उनके शरीर को तीनों सेनाओं के प्रमुखों और राष्ट्रीय व राज्य के गणमान्य व्यक्तियों कैबिनेट मंत्री मनोहर पर्रीकर, वेंकैया नायडू, पॉन राधाकृष्णन; और तमिलनाडु और मेघालय के राज्यपाल के.रोसैया और वी. षडमुखनाथन ने हवाई अड्डे पर प्राप्त किया एक संक्षिप्त समारोह के बाद कलाम के शरीर को एक वायु सेना के हेलिकॉप्टर में मंडपम भेजा गया मंडपम से कलाम के शरीर को उनके गृह नगर रामेश्वरम एक आर्मी ट्रक में भेजा गया अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए उनके शरीर को स्थानीय बस स्टेशन के सामने एक खुले क्षेत्र में प्रदर्शित किया गया ताकि जनता उन्हें आखरी श्रद्धांजलि दे सके.

30 जुलाई 2015 को पूर्व राष्ट्रपति को पूरे सम्मान के साथ रामेश्वरम के पी करूम्बु ग्राउंड में दफ़ना दिया गया प्रधानमंत्री मोदी तमिलनाडु के राज्यपाल और कर्नाटक केरल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों सहित 350000 से अधिक लोगों ने अंतिम संस्कार में भाग लिया.

भारतीय देशवाशियो की प्रतिक्रियाये

Dr A.P.J abdul kalam के निधन से देश भर में और सोशल मीडिया में पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि देने के लिये अनेक कार्य किये गए. भारत सरकार ने abdul kalam को सम्मान देने के लिए सात दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर शोक व्यक्त किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा “उनका कलाम का निधन वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है, वह भारत को महान ऊंचाइयों पर ले गए उन्होंने हमें मार्ग दिखाया” पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जिन्होंने कलाम के साथ प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की थी. कहा “उनकी मृत्यु के साथ हमारे देश ने एक महान मनुष्य को खोया है जिसने हमारे देश की रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया है. मैंने प्रधानमंत्री के रूप में डॉ कलाम के साथ बहुत निकटता से काम किया है. मुझे हमारे देश के राष्ट्रपति के रूप में उनकी सलाह से लाभ हुआ उनका जीवन और काम आने वाली पीढ़ियों तक याद किया जाएगा.

दलाई लामा ने अपनी संवेदना और प्रार्थना व्यक्त की और कलाम की मौत को “एक अपूरणीय क्षति” बोले, अपना दुख व्यक्त किया. उन्होंने यह भी कहा, “अनेक वर्षों में, मुझे कई अवसरों पर कलाम के साथ बातचीत करने का मौका मिला वह एक महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद और राजनेता ही नहीं, बल्कि वे एक वास्तविक सज्जन थे, और हमेशा मैंने उनकी सादगी और विनम्रता की प्रशंसा की है. मैंने सामान्य हितों के विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला पर हमारी चर्चाओं का आनंद लिया, लेकिन विज्ञान, अध्यात्म और शिक्षा के साथ मुख्य रूप से हमारे बीच चिंतन किया जाता था.

दक्षिण एशियाई नेताओं ने अपनी संवेदना व्यक्त की और भूटान सरकार ने कलाम की मौत के शोक के लिए देश के झंडे को आधी ऊंचाई पर फहराने के लिए आदेश दिया, और श्रद्धांजलि में 1000 मक्खन के दीपक की भेंट किए. भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने कलाम के प्रति अपना गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, ” वे एक महान नेता थे जिनकी सभी ने प्रशंसा की विशेषकर भारत के युवाओं के वे प्रशंसनीय नेता थे जिन्हें वे जनता का राष्ट्रपति बुलाते थे.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने उनकी व्याख्या करते हुए कहा, “एक महान राजनेता प्रशंसित वैज्ञानिक और दक्षिण एशिया के युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत के संयोग” उन्होंने कलाम की मृत्यु को “भारत के लिए अपूरणीय क्षति से भी परे बताया. ” उन्होंने यह भी कहा कि भारत के सबसे प्रसिद्ध बेटे, पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर हमें गहरा झटका लगा है. Dr A.P.J abdul kalam अपने समय के सबसे महान ज्ञानियों में से एक थे. वह बांग्लादेश में भी बहुत सम्मानित थे. उनकी विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की वृद्धि करने के लिए अमूल्य योगदान के लिए वे सभी के द्वारा हमेशा याद किये जायेंगे. वे दक्षिण एशिया की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत थे जो उनके सपनों को पंख देते थे. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की प्रमुख खालिदा जिया ने कहा, “एक परमाणु वैज्ञानिक के रूप में, उन्होंने लोगों के कल्याण में स्वयं को समर्पित किया.” अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी, ने कलाम को, “लाखों लोगों के लिए एक प्रेरणादायक शख्सियत बताया” ये नोट करते हुए “हमे अपने जीवन से बहुत कुछ सीखना है.” नेपाली प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने भारत के लिए कलाम के वैज्ञानिक योगदानों को याद किया. “नेपाल ने एक अच्छा दोस्त खो दिया है और मैंने एक सम्मानित और आदर्श व्यक्तित्व को खो दिया है. ” पाकिस्तान के राष्ट्रपति , ममनून हुसैन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर उनके प्रति दु: ख, शोक व संवेदना व्यक्त की.

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने कहा, “डॉ कलाम दृढ़ विश्वास और अदम्य भावना के आदमी थे मैंने उन्हें दुनिया के एक उत्कृष्ट राजनेता के रूप में देखा था.  उनकी मौत भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है.

इंडोनेशियाई राष्ट्रपति सुसीलो बम्बनग युधोयोनो, मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सियन लूंग, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नहयान सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय नेताओं, और संयुक्त अरब अमीरात के प्रधानमंत्री और दुबई के शासक ने भी कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित की. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत सरकार, भारत के सभी लोगों के लिए और मृतक नेता ले प्रियजनों के लिए अपनी गंभीर संवेदना व्यक्त की और अपनी सहानुभूति और समर्थन से अवगत कराते हुए कहा, “डॉ कलाम को हमारे देशों के बीच लगातार मैत्रीपूर्ण संबंधों के एक प्रतिपादक के रूप में याद किया जाएगा, उन्होंने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने में सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के लिए व्यक्तिगत योगदान दिया. उन्होंने पारस्परिक रूप से लाभप्रद रूसी-भारतीय सहयोग जोड़ने के लिए बहुत कुछ किया.

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, “अमेरिकी लोगों की ओर से, मैं पूर्व भारतीय राष्ट्रपति Dr. a.p.j abdul kalam के निधन पर भारत के लोगों के लिए अपनी गहरी संवेदना का विस्तार करना चाहता हूँ. एक वैज्ञानिक और राजनेता, डॉ कलाम ने अपनी विनम्रता से घर में और विदेशों में सम्मान कमाया और भारत के सबसे महान नेताओं में से एक बने. भारत-अमेरिका के मजबूत संबंधों के लिए, डा कलाम ने सदा वकालत की. 1962 में संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा के दौरान नासा के साथ अंतरिक्ष सहयोग को गहरा करने के लिए काम किया भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में इनके कार्यकाल के दौरान अमेरिका-भारत संबंधों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई उपयुक्त रूप से नामित “पीपुल्स प्रेसिडेंट” (जनता के राष्ट्रपति) ने सार्वजनिक सेवा, विनम्रता और समर्पण से दुनिया भर के लाखों भारतीयों और प्रशंसकों को एक प्रेरणा प्रदान की है.”

व्यक्तिगत जीवन

डॉक्टर कलाम अपने व्यक्तिगत जीवन में पूरी तरह अनुशासन का पालन करने वालों में से थे. ऐसा कहा जाता है कि वे क़ुरान और भगवद् गीता दोनों का अध्ययन करते थे. कलाम ने कई स्थानों पर उल्लेख किया है कि वे तिरुक्कुरल का भी अनुसरण करते हैं, उनके भाषणों में कम से कम एक कुरल का उल्लेख अवश्य रहता था.राजनीतिक स्तर पर कलाम की चाहत थी कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका विस्तार हो और भारत ज्यादा से ज्याद महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाये. भारत को महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढाते देखना उनकी दिली चाहत थी. उन्होंने कई प्रेरणास्पद पुस्तकों की भी रचना की थी और वे तकनीक को भारत के जनसाधारण तक पहुँचाने की हमेशा वक़ालत करते रहे थी. बच्चों और युवाओं के बीच डाक्टर क़लाम अत्यधिक लोकप्रिय थे. वह भारतीय अन्तरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के कुलपति भी थे.

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